मंदिर का इतिहास

 ॐ नमः शिवायः                                                                       जय भोलेनाथ जी की

श्री कमलेश्वर शिव मंदिर का निर्माण 80 के दशक के दौरान हुआ था उस समय एक साधु बाबा भर्मण करते हुए इस त्रिवेणी संगम पहुंचे और कुछ दिन वही त्रिवेणी  घाट के किनारे किसी एक खेत में छप्पर ओढ़ कर रहने लगे थे क्यूंकि उस समय वहां पर कोई मंदिर नहीं हुआ करता था तो वह साधु बाबा त्रिवेणी घाट किनारे छप्पर ओढ़ कर रहने पर मजबूर थे। कुछ समय बाद उन साधु बाबा ने यहां के लोगों को बताया की इस त्रिवेणी संगम के बिच में भगवान् भोलेनाथ जी का शिवलिंग इस त्रिवेणी के निचे मौजूद है इसलिए आप लोगों को यहाँ भगवन शिव जी (भोलेनाथ जी) की मंदिर की स्थापना करनी चाहिए और आगे चलकर एक दिन यह शिलिंग ऊपर धरती पर प्रकट होगा और साथ ही इस त्रिवेणी की तीन नदियों में से एक नदी (कालागाढ़) में दूध की धारा भी मौजूद है और एक पवित्र त्रिवेणी के लिए यह एक बहुत ही शुभ है जो की बहुत ही कम संगमों पर ऐसा सब कुछ एक साथ होना अपने आप में बहुत ही अलौकिक एवं पवित्र है। कुछ दिन बीत जाने के बाद यहाँ के ग्राम निवासी और उस समय के पत्थर के मिस्त्री स्व. श्री झांकुर सिंह खेतवाल जी ग्राम - पधानु बाखली वालों ने वह स्वयं ही मंदिर निर्माण करने का निर्णय लिया और मंदिर निर्माण करने लगे मगर आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह अकेले ही इस मंदिर निर्माण कार्य को पूर्ण नहीं कर पाए और यह मंदिर निर्माण अधूरा रह गया। लोग इस अधूरे मंदिर भवन को अबसकुन (क्षेत्र के लिए नुकसान दाय)  मानने लगे और जल्द से जल्द इस मंदिर निर्माण कार्य को पूरा करने पर विचार करने लगे। तब उस समय ग्राम बजरखोड़ा निवासी स्व. श्रीमती जी एवं स्व. श्री जी ने अपनी भूमि मंदिर निर्माण कार्य लिए दान करने घोषणा की और श्री गंगा सिंह खेतवाल जी सुपुत्र स्व. श्री जी ग्राम पधानु बाखली, बजरखोड़ा वालों ने मंदिर निर्माण कार्य के खर्चे की जिम्मेदारी उठाई और क्षेत्र वासियों ने तन -मन से सहयोग किया, तब जाकर सन 1993 में पहली बार शिव मंदिर के साथ साथ बाबा भैरव नाथ जी के मंदिर का भी निर्माण कार्य पूर्ण हुआ तबसे इस पवित्र त्रिवेणी संगम पर सर्धालुओं के लिए भोलेनाथ के द्वार हमेशा के लिए खुल गए।  कुछ समय बाद मंदिर सेवा समिति बनायीं गयी फिर धीरे - धीरे सेवा समिति ने मंदिर में रहने वाले साधु बाबा जी के रहने के लिए कुटिया फिर हवन घर , माँ दुर्गा जी का मंदिर और महावीर बजरंगबली जी के मंदिर का भी निर्माण किया गया। 1993 से लेकर अब तक मंदिर प्रांगण में बहुत से धार्मिक कार्यों का आयोजन भी सेवा समिति द्वारा निरंतर कराया जाता रहा है और आगे भी कराया जाता रहेगा और धार्मिक आयोजनों के साथ साथ निरंतर बदलते समय के अनुसार सभी मंदिर भवनों का पुनर्निर्माण एवं मंदिर प्रांगण में लगातार सौन्दर्यीयकरण कराया जाता है और वर्तमान में श्री कमलेश्वर शिव मंदिर क्षेत्र में दूसरा सबसे भव्य शिव मंदिर के तौर पर लोगों की आस्था का प्रतिक बनकर विराजमान है।